गोरखपुर 30 नवंबर 2025। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय स्थित महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ की 7वीं स्थापना दिवस का आयोजन किया गया। आयोजन का शुभारम्भ मुख्य अतिथि प्रो. सुघन कुमार पौडेल, निदेशक, नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय, दांग, नेपाल, प्रो. गणेश शंकर विद्यार्थी, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ एवं डॉ. कुशल नाथ मिश्र, उप निदेशक, महायोगी गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ के द्वारा किया गया। इस समारोह के मुख्य अतिथि नेपाल संस्कृत विश्वविद्यालय, दांग, नेपाल के प्रो. सुघन कुमार पौडेल रहे।
इससे पूर्व सुबह 9:00 बजे रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। जिसमें विश्वविद्यालय के अनेक विभागों के शिक्षक सम्मिलित हुए। इसके उपरांत 12:00 बजे संस्कृत अध्ययन केंद्र का उद्घाटन किया गया। इसके पश्चात शोधपीठ के उप निदेशक डॉ. कुशलनाथ मिश्र ने शोधपीठ के विगत ढाई वर्षों की कार्य प्रगति एवं भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो. गणेश शंकर विद्यार्थी ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत में देश की परंपरा के साहित्य का समृद्ध संग्रह है। संस्कृत का वर्तमान समय में अध्ययन से विद्यार्थी देश की समृद्ध संपदा से परिचित हो सकेंगे।
मुख्य अतिथि प्रो. सुघन कुमार पौडेल ने अपने सम्बोधन में कहा कि संस्कृत आज के तकनीकी युग में भी निरंतर आगे प्रगति की ओर बढ़ रहा है। संस्कृत भाषा में भारत का दर्शन अनुस्यूत है। संस्कृत संस्कृति की संवाहक है। शोधपीठ को एक उत्कृष्ठ शोध संस्थान बनाने के लिए संस्कृत के अध्ययन की भी आवश्यकता है। इस दिशा में शोधपीठ का कार्य अत्यंत सराहनीय है।
*गोरक्षनाथ शोधपीठ में संस्कृत अध्ययन केंद्र का शुभारंभ*
इस कार्यक्रम में श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली द्वारा संचालित संस्कृत अध्ययन केंद्र का शुभारंभ किया गया। प्राचीन ज्ञान-विज्ञान की मूल आधारभूत भाषा संस्कृत को अधिक से अधिक व्यापक बनाने और उसके लिए आम जनमानस को जागरूक करने के लिए दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय स्थित गोरक्षनाथ शोधपीठ में इस केंद्र की स्थापना की गई है। इस अध्ययन केंद्र से छह महीने का संस्कृत का कोर्स चलाया जा रहा है। कोर्स के सफल संचालन हेतु केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के द्वरा संस्कृत शिक्षक निपा चौधरी की नियुक्ति की गई है। इस कोर्स में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को संस्कृत बोलना सिखाया जा रहा है। इस कोर्स को संस्कृत भाषा प्रमाणपत्रीय पाठ्यक्रम का नाम दिया गया है।
कार्यक्रम का संचालन शोधपीठ की शोध अध्येता डॉ. हर्षवर्धन सिंह के द्वारा किया गया। धन्यवाद ज्ञापन निपा चौधरी द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा, प्रो. अनुभूति दुबे, डॉ. धर्मदत्त तिवारी, डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी, सहायक निदेशक डॉ. सोनल सिंह, सहायक ग्रन्थालयी डॉ. मनोज कुमार द्विवेदी, रिसर्च एसोसिएट डॉ. सुनील कुमार, चिन्मयानन्द मल्ल, शोध छात्र-छात्रायें तथा विद्यार्थी उपस्थित रहे।

